हे राम सुनो ये भक्त तुम्हारा तुमको ले जाने आया है

हे राम सुनो यह भक्तों तुम्हारा तुमको ले जाने आया है वैकुण्ठ को टियागो धरा पर आओ
भक्त प्रभु को लेने आया है अकेला तब तक लडूंगा इनसे मैं तुमसे शूरवीर नहीं
जो इनके अधर्म को काट सके मेरे तरकश में ऐसा तीर नहीं मुझ पर कोई बात करें
तो मैं मन ही मन मुस्कऊंगा पर मेरे श्रीराम पर जब कोई बात उठाएगी कैसे
मैं सह पाऊंगा अरे जितना मुझसे हो सकता है उतना करता जाता हूं यहां अधर्मियों के
भक्त शास्त्रों में अकेला इन से टकराता हूं Bhagwan Ram Poetry Hindi

रावण के यहां भक्त करोड़ों ऐसा धर्म का साया है राम सुनो यह तो भक्त तुम्हारा तुमको
ले जाने आया है अरे अधर्मी धर्म को गलत ठहराते में तनिक नहीं कराता हूं धर्म अधर्म का
भेद बताता बस यही कहता जाता हूं अखंड तेजवंत वो जो एक नाम है जिससे मुरझाए
पुष्प भी खिल जाएंगे सीना हमारा भी चीर कर के देख लो सारंग लिए हाथ में
प्रभु श्रीराम तुम्हें मिल जाएंगे अरे राजधर्म पितृ भक्ति मातृ प्रेम की सनातनियो को पराकाष्ठा फिर बताते हैं

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आओ फिर से भारत वर्ष को हम मिलकर रघुनाथ की लीला नहीं दिखाते हैं
फिर से अद्भुत वह बेला आए जब रघुकुल में रघुनाथ पधारे थे
अवध की माटी चंदन करने को ईश्वर स्वयं जब सज्ज हुए थे
दशरथ नंदन बनने को अधर्मियों के कच्चे चिट्ठे खोलने धर्म का डंका बजाने आया है

Bhagwan Ram Poetry Hindi | हे राम सुनो ये भक्त तुम्हारा तुमको ले जाने आया है

राम सुनो यह भक्त तुम्हारा तुमको ले जाने आया है खुद के संग नल नील ले आना जो
मस्तक शत्रु का काट सके पर पहले ऐसा उनसे सेतु बनवाना सनातनियो के
दिलों के बीच की खाई को जो पाट सके जटायु जैसा एक वीर ले आना
अधर्मियों के सामने दीवार बन जो खड़ा रहे मां बहनों की रक्षा हेतु अधर्मियों
समक्ष धर्मात्मा अकेला डटा रहे बजरंगबली को भी प्रभु ले आओ

ब्रह्मचर्य की शक्ति सबको दिखाने है आज अधर्मी जो सर पर चढ़ा बैठे हैं लंका
में उनकी आग फिर से लगानी है सुग्रीव जैसा मित्र ले आओ सच्ची मित्रता
जो फिर दिखा सके अधर्म को मित्र धर्म बताने वालों को पाठ उचित जो पढ़ा सके
सनातन सभ्यता को फिर से उजागर कर दो क्यों दर्शन को तरसाया है
राम सुनो यह भक्त तुम्हारा तुमको ले जाने आया है Bhagwan Ram Poetry Hindi

पाप प्रचंड पनपा पृथ्वी पर पृथ्वी पाप है प्रतिबिंब बनी प्रतीक्षा कर रही है
यह धरा मासूमों के जो खून सनी अरे जितना भी हो सकेगा हम से धर्म के
विरुद्ध आवाज उठाते जाएंगे धर्मपरायण वीरों धर्मगाथा समाज में गाते जाएंगे
धर्म ध्वजा धारण करके चलते रहेंगे इस देह जब तक सांस रहेगी राम राज्य के
दर्शन की केवल ह्रदय में भक्त के आस रहेगी कश्मीर के टूटे मंदिर पूछ रहे हैं

हे राम सुनो ये भक्त तुम्हारा तुमको ले जाने आया है

क्या प्रभु राम फिर से आएंगे पंडितों की जलती चिताए पूछ रही हैं क्या जिहादी
राक्षसों को प्रभु कलयुग में फिर से मार गिराए जिस धरा को तुमने मर्यादा सिखलाई
उसकी पलट चुकी अब काया है राम सुनो यह भक्त तुम्हारा तुमको ले जाने आया है

मनुज तामस में डूब चुका है समझ नहीं कुछ आता है सभ्यता दिखाने हेतु भी
यहां पर मैं खाने जाया जाता है आज नारी में मैया सीता सा तेज नहीं है प्रेम की
बदली पार्टी है और नारी की सुंदरता भी आज उसके प्रेमियों की संख्या से नापी जाती है
नर भी भीतर से भ्रष्ट हुआ है भीषण अधर्मी जमाना आया है दूध मुहि बच्चियों को भी
दरिंदों ने नोच नोच कर खाया है जिन्होंने बेटियों की जिंदगी नर्क करी उनको भी धरती
पर नर्क दिखाना है न जाने कितनी देर भैया आसिफा की रूहें तड़प रही है

उनको इंसाफ दिलाना है अब तो भक्तों को दरस दिखा दो क्यों दर्शन को तरसाया है
फिर राम सुनो यह भक्त तुम्हारा तुमको ले जाने आया है हम भी भीषण युद्ध करेंगे जब
भैया लक्ष्मण धनुष से खुद टैंकर करेंगे अधर्मी भय से थरथर कापेंगे जब भैया लक्ष्मण
रणभूमि में हुंकार भरेंगे अरे वीरों की माटी पर फिर से भगवा झंडा लहराएगा
अरे भारत भूमि पावन माटी पर फिर से रामराज्य आएगा जब तक आप नहीं आते

हे राम सुनो ये भक्त तुम्हारा तुमको ले जाने आया है

धरती पर धर्म पताका भक्त तुम्हारे थामेंगे भैया भरत की भांति धर्म की अलख जगायेंगे हम
पर सिहासन पर हमारे प्रभु श्री राम विराजे गे तुम्हारे भक्त भी वीर बड़े हैं अधर्मियों से ना
कात्रयंगे अरे जो इस मा धरती पर होता न्याय दिखेगा पापियों की छाती पर बन परशुराम
चढ़ जाएंगे भक्त तुम्हारा पापियों से नहीं डरेगा सिर पर उसके तुम्हारे हाथ की छाया है
राम सुनो यह भक्त तुम्हारा तुमको ले जाने आया है राम सुनो यह भक्त तुम्हारा तुमको ले जाने आया है

Deepankur Bhardwaj Bhagwan Ram Poetry Hindi

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